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नववर्ष का इंतजार


अमरेंद्र कुमार की कलम से:

पूरे बरस का अंतिम पहर,

पछुआ पवन की लहर,

कंपकपाती ठंड में,

सोए बिन रात को बिहान करूंगा,

ऐ नव वर्ष तेरा मैं  इंतजार करूंगा।

बरस की खुशी को पलकों में समेटे,

बरस की बेबसी को बगल में लपेटे,

चांदनी रात में,

सप्तरंगी ओढ़े आना, दीदार करूंगा,

ऐ नव वर्ष तेरा मैं इंतजार करूंगा।


(बहुत सारे अच्छे, बुरे समय से दो-दो हाथ होने के बाद हर समय एक नई आशा जुड़ती है। यही आशा मैं आने वाले नववर्ष से करता हूं। इंतजार करता हूं।)

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